वड़ापाव गर्ल "चंद्रिका दीक्षित" क्या है सच
फेसबुक पर शेयर इस पोस्ट की पता नहीं कितनी सच्चाई है पर इसे सच मान भी लिया जाय तो किसी की परिस्थिति से जन्मी किसी भावनात्मक पीड़ा की विह्वलता का इस तरह से माखौल उड़ाना भारतीय संस्कृति का अपमान है नारी का हर हाल में सम्मान होना चाहिए। उसके भावनात्मक पीड़ा को समझने की जरूरत है। यदि उक्त वक्तव्य सही है तो संदर्भित व्यथा आर्थिक तंगी की ओर इशारा कर रही है। अच्छा होगा कि ऐसी बात की जाए कि इन्हें इस मानसिक पीड़ा से बाहर निकलने का आत्मबल मिल सके। इन्हें गंदा कहना अशोभनीय है। उक्त घटना आर्थिक तंगी जो कहानी दिखा रही है उससे आसानी से समझा जा सकता है कि आज सही ढंग से पैसा कमा पाना कितना कठिन है कि कोई स्वयं की अस्मिता का ही सुध भूल बैठे। यदि घटना सत्य है तो इनकी मानसिक पीड़ा कोई साधारण बात नहीं हमें कम से कम इनका आत्मबल तो बढ़ाना ही चाहिए। आप नारी शक्ति हैं, आप अपराजेय हैं, साहस जुटाइए, आगे बढ़िए, आपकी जिंदगी अवश्य खुशहाल होगी। 🌷🌷🌷🌷✍️✍️ आप अपने उस बच्चे की ओर देखिए जिसके प्रति आपके हृदय में स्वयं के लाज से ज्यादा स्नेह है। 🌷🌷🌷🌷✍️✍️ जब मुश्किल आए तो परेशान...