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Showing posts from December, 2025

बुजुर्गों की नम आँखें बनी संवेदनाओं के आदान–प्रदान का जीवंत दृश्य

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  जौनपुर । विगत दिनों एस एस पब्लिक स्कूल, सिद्दीकपुर, जौनपुर के माध्यम से जौनपुर स्थित वृद्धा आश्रम में कंबल वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे विशेष बात यह रही कि कंबल विद्यालय के बच्चों के कर-कमलों से वृद्धजनों को प्रदान किए गए। बच्चों की मासूम मुस्कान और बुजुर्गों की नम आँखें इस बात की गवाह बनीं कि यह केवल कंबल वितरण नहीं, बल्कि संवेदनाओं का आदान–प्रदान था। विद्यालय के "निदेशक : श्री विश्वतोष नारायण सिंह" ने इस मानवीय व अनुसरणीय कार्य के बारे में स्वयं के शब्दों में क्या कहा आगे पढ़कर आप स्वयं जान सकते हैं। निदेशक श्री ने कहा... "यद्यपि यह कार्य मैं स्वयं भी जाकर कर सकता था, लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास है कि जब ऐसे कार्यों में बच्चों को सहभागी बनाया जाता है, तो उनके भीतर मानवीय मूल्यों का बीजारोपण होता है। मेरी मंशा यही थी कि बच्चे बुजुर्गों के प्रति सम्मान, करुणा और अपनापन महसूस करें और यह समझें कि समाज में हर बुजुर्ग हमारे स्नेह और सहयोग का अधिकारी है। यह उल्लेखनीय है कि यह पहला अवसर नहीं था। इसके पूर्व भी विद्यालय के बच्चों द्वारा वृद्धा आश्रम में र...

जानिए पतंगबाजी पर बैन की जरूरत.....को लेकर क्या कहा एस. एस. पब्लिक स्कूल के निदेशक विश्वतोष नारायण सिंह ने

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यद्यपि NGT के आदेशानुसार चायनीज मांझे की खरीद फरोख्त व भंडारण पूर्णतः प्रतिबंधित है। इसके बावजूद चोरी छिपे चल रही खरीद फरोख्त दर्दनाक घटनाओं का सबब बन रही है। अतः शासन प्रशासन से अनुरोध है कि पतंगबाजी को ही प्रतिबंधित करने पर विचार करें। न रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी। पतंगबाजी पर अंकुश जितनी जल्दी हो सके लगना चाहिए कब तक यूँ ही गर्दनें कटती रहेंगी? इधर कुछ वर्षों से चाइनीज़ मांझे का प्रचलन बेहिसाब बढ़ गया है। रंगीन, चमकीला और सस्ता .....लेकिन इसकी धार लोगों की गर्दन पर चलती है। हर साल हज़ारों घटनाएं सामने आती हैं, जिनमें सड़क पर चलते लोग अचानक इस खतरनाक मांझे की चपेट में आकर बुरी तरह घायल हो जाते हैं। कई तो अपनी जान तक गंवा बैठते हैं। जौनपुर। हालिया घटना जौनपुर की है। शास्त्रीपुल(नया पुल) जौनपुर, उत्तर प्रदेश , पर एक पिता अपने बच्चे को स्कूल छोड़कर घर लौट रहे थे। गोमती पुल से गुजरते समय उनकी गर्दन चाइनीज़ मांझे में फंस गई। चोट इतनी गहरी थी कि उन्हें बचाया नहीं जा सका।  घर लौटा तो सिर्फ़ दुःख, पिता नहीं। सोचिए… एक मनोरंजन किसी का जीवन छीन ले.....क्या यह स्वीकार्य है? पतंग उड़ाने के ...

"एक खतरनाक साजिश की सच्चाई ::

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  "संयुक्त परिवार बनाम आधुनिक बाजार"                      प्रो.(कैप्टन) अखिलेश्वर शुक्ला!               भारतीय सामाजिक संयुक्त परिवार को खंड खंड करके एक समृद्ध बाजार विकसित करने का जो सुनियोजित कुचक्र चल रहा है। फल फूल और विकसित हो रहा है। इतना कुछ विदेशी आक्रमणकारीयों और लुटेरों ने भी नहीं किया जो आधुनिक काल में दिख रहा है ।                           भारतीय संयुक्त परिवार :-                    भारतीय संयुक्त परिवार में तीन- तीन पीढियां , पांच -पांच भाईयों का परिवार- एक आंगन, एक छत , एक चुल्हा, एक नल, एक रसोई घर , एक बैठका , एक  गौशाला , एक कार/,स्कुटर/सायकिल/आदि के साथ , बच्चों में संस्कार , सामाजिक सुरक्षा , पर्व त्योहार में उत्साह ,खर्च में सामुहिकता, बुजुर्गो की सेवा- सम्मान सहित हर्षोल्लास का माहौल रहता था।        आधुनिक बाजार :-  ...